BSc करने के लिए 12वीं में कम से कम 50% अंक होने चाहिए। कई विश्वविद्यालयों में प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद प्रवेश दिया जाता है और कुछ में आपको सीधे प्रवेश भी दिया जाता है। BSc के अंतर्गत फिजिक्स, मैथ्स, केमिस्ट्री, बायोकेमिस्ट्री, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, जूलॉजी जैसे विषयों की पढ़ाई करनी होती है। BSc करने के बाद आप B.Tech और BEd. जैसे कोर्स भी कर सकती हैं। अगर आप डॉक्टर बनना चाहती हैं तो NEET क्वालिफाई करने के बाद आप MBBS, BDS, आदि बैचलर कोर्स में एडमिशन ले सकती हैं। आप BMLT, बीएससी नर्सिंग, पैरामेडिकल कोर्स भी कर सकती हैं। BSc में रोबोटिक्स, स्पेस साइंस जैसे कई विकल्प हैं जिनमें आप अच्छा भविष्य बना सकती हैं।


सरकारी स्कूल में शिक्षक बनने के लिए आपको 12वीं के बाद स्नातक की पढ़ाई पूरी करनी होगी। ग्रेजुएशन में आप जिस विषय को पढ़ाना चाहते हैं उसका चयन करें। ग्रेजुएशन के बाद आप B.Ed कोर्स में एडमिशन लें। यह 2 साल का कोर्स है। B.Ed करने के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा TET, CTET पास करना अनिवार्य है। हर साल CTET यानी केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा और राज्य स्तरीय TET परीक्षा आयोजित की जाती है। इन परीक्षाओं को पास करने के बाद आप शिक्षक पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। राज्य स्तरीय नियुक्ति परीक्षा TET पास करके और CTET पास करने के बाद संबंधित राज्य के केंद्रीय विद्यालयों में प्राथमिक शिक्षक या TGT बन सकते हैं। PGT बनने के लिए पोस्ट ग्रेजुएट होना और संबंधित परीक्षा पास करना जरूरी है।


गेम डेवलपिंग या गेम डिजाइनिंग में करियर बनाने के लिए कई डिग्री और डिप्लोमा कोर्स उपलब्ध हैं। जैसे कि डिप्लोमा इन गेम डेवलपिंग, डिप्लोमा इन गेमिंग प्रोडक्शन, बीए इन डिजिटल फिल्म मेकिंग एंड एनिमेशन, बीटेक इन कंप्यूटर साइंस एंड गेम डेवलपमेंट आदि। आप बीसीए कर रहे हैं तो आपको C++ और Java जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की जानकारी होगी। जिससे इस क्षेत्र में आपके लिए रोजगार के अच्छे अवसर उपलब्ध होंगे। इसके अलावा 2डी, 3डी मॉडलिंग डायरेक्टर एक्स, 3डी पैकेज और सॉफ्टवेयर का ज्ञान होना जरूरी है। अगर आपके पास ये स्किल्स हैं तो आप कंप्यूटर गेम प्रोड्यूसर, गेम डिजाइनर, एनिमेटर, ग्राफिक डिजाइनर के तौर पर इस क्षेत्र में अपना करियर शुरू कर सकते हैं।


ग्रेजुएशन के बाद आपके पास करियर विकल्प के रूप में कई अवसर उपलब्ध होते हैं। अगर आप टीचिंग के क्षेत्र में जाना चाहते हैं तो बीएड आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। बीएड करने के बाद आप निजी और सरकारी स्कूलों में शिक्षक के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अलावा रेलवे और बैंकिंग क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। आप यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में भी भाग ले सकते हैं। आप कर्मचारी चयन आयोग एसएससी की भी तैयारी कर सकते हैं। इसके तहत आयोजित होने वाली परीक्षाओं जैसे एमटीएस, सीएचएसएल, सीजीएल आदि के लिए आवेदन कर सकते हैं। अगर आप समाज सेवा के क्षेत्र में जाने के इच्छुक हैं तो नर्सिंग कोर्स करके स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।


सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद आप रेलवे समेत अन्य सरकारी नौकरियों या निजी क्षेत्र में जूनियर इंजीनियर के पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। आप सरकारी विभागों में क्लर्क, ट्रेनी टेक्निशियन, सुपरवाइजर आदि पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण, ओएनजीसी, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड और सिंचाई विभाग, राज्य बिजली बोर्ड, एनटीपीसी लिमिटेड, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन आदि सहित निजी क्षेत्र में अवसर तलाशे जा सकते हैं। बीए के बाद, आप कई सरकारी परीक्षाओं जैसे एसएससी, बैंकिंग, पुलिस सेवा आदि में शामिल हो सकते हैं। अगर आपको पढ़ाने में रुचि है तो आप बी.एड. भी भी कर सकते हैं।


फोटोनिक्स प्रकाश का विज्ञान है। इसमें फोटॉन और प्रकाश तरंगों का पता लगाने के साथ-साथ उत्पन्न करने और नियंत्रित करने की तकनीक का अध्ययन किया जाता है। 12वीं पास करने वाले छात्र भारत के कई विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकते हैं। भारत में फोटोनिक्स को एक अंतःविषय पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाया जाता है। इस क्षेत्र में प्रमुख स्नातक पाठ्यक्रम फोटोनिक्स या आप्टो इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा व् फोटोनिक्स सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक्स में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग और बीएससी हैं। उच्च शिक्षा के लिए एम.टेक फोटोनिक्स या ऑप्टो इलेक्ट्रॉनिक्स या पीएचडी -फोटोनिक्स भी कर सकते हैं। भारत में फोटोनिक्स विशेषज्ञों की कमी के कारण इस क्षेत्र में जल्द ही काम मिलने की संभावना बनी रहती है।


साइकोलॉजी से ग्रेजुएशन करने के बाद पब्लिक और प्राइवेट हेल्थकेयर, एजुकेशन, स्पोर्ट्स, सोशल वर्क, थेरेपी एंड काउंसलिंग जैसे कई सेक्टर में करियर बनाया जा सकता है। आपके लिए करियर काउंसलर, क्लीनिक साइकोलॉजिस्ट, फॉरेंसिक साइकोलॉजिस्ट, इंडस्ट्रियल या ऑर्गेनाइजेशन साइकोलॉजिस्ट के तौर पर भी कई विकल्प मौजूद होते हैं। अगर आप वाक़ई साइकोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं तो MA, MSc. या अप्लाइड साइकोलॉजी के कोर्स के बाद आप अपना खुद का क्लीनिक भी खोल सकते हैं। इसके अलावा आप बतौर ऑक्यूपेशनल साइकोलॉजिस्ट, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजर, ऑर्गेनाइजेशनल साइकोलॉजिस्ट, फैमिली सर्विस वर्कर और रिहैबिलिटेशन काउंसलर के रूप में भी अपनी सेवाएं दे सकते हैं।


होटल मैनेजमेंट से जुड़े कोर्स करने के लिए आपको 12वीं या इसके समकक्ष उत्तीर्ण होना चाहिए और 12वीं में अंग्रेजी अनिवार्य विषय होना चाहिए। 12वीं के बाद आप बैचलर इन होटल मैनेजमेंट, बैचलर इन होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी, बीएससी इन हॉस्पिटैलिटी एंड होटल एडमिनिस्ट्रेशन जैसे कोर्स चुन सकते हैं। इस फील्ड में कामयाब होने के लिए कुछ व्यक्तिगत गुणों का होना भी जरूरी है जैसे मृदुभाषी होना, सेवा और आतिथ्य को धर्म की श्रेणी में रखना वग़ैरह। आतिथ्य उद्योग में विभिन्न प्रकार की नौकरियां उपलब्ध हैं जैसे मैनेजर फ्रंट ऑफिस, हाउसकीपिंग, बैंक्वेट प्रबंधक या फास्ट फूड जॉइंट, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन एंड कैटरिंग आदि।

ग्रामीण विकास में स्नातकोत्तर करने के बाद आपके पास सरकारी और निजी दोनों संस्थानों में नीति निर्माता, विश्लेषक, प्रबंधक, ग्रामीण विकास अधिकारी, शोधकर्ता, सलाहकार के रूप में काम करने के मौके होते हैं। इसके अलावा आप गांव के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों के साथ भी काम कर सकते हैं। कई गैर सरकारी संगठन ग्रामीण प्रबंधन के लिए पेशेवरों की नियुक्ति भी करते हैं। इसके साथ ही आप चाहें तो अपना एनजीओ खोलकर भी ग्रामीण विकास के लिए काम कर सकते हैं। अगर इस क्षेत्र में अनुमानित सैलरी की बात करें तो आप किसी प्राइवेट कंपनी या संस्था से जुड़कर 4 से 5 लाख रुपये का सालाना पैकेज पा सकते हैं।


PCB से इण्टर करने के बाद आप पैरामेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए संयुक्त पैरामेडिकल और नर्सिंग प्रवेश परीक्षा (CPNET) में भाग ले सकते हैं। इसके अलावा आप NEET-PG, MHT-CET प्राइवेट और सरकारी कॉलेजों में भी सीधे एडमिशन ले सकते हैं। इस क्षेत्र में आपके लिए ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा या सर्टिफिकेट जैसे कोर्स उपलब्ध हैं। आप अपने इंटरेस्ट के हिसाब से कोर्स चुन सकते हैं। कोर्स करने के बाद आप मेडिकल लेबोरेटरी टेक्निशियन, टेक्नोलॉजिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट बन सकते हैं। आप इमरजेंसी सेंटर, ब्लड डोनेशन सेंटर, डायग्नोसिस सेंटर, फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज, मेडिसिन लैब, क्लिनिक जैसी जगहों पर भी काम कर सकते हैं।


साइंस विषय से 12वीं पास करने के बाद आप काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर द्वारा संचालित नेशनल एप्टीट्यूड टेस्ट इन आर्किटेक्चर कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। ग्रेजुएशन के बाद आप सरकारी या निजी क्षेत्र में आर्किटेक्ट के रूप में अपना करियर बना सकते हैं। लोक निर्माण विकास प्राधिकरण और सरकारी विभागों आदि में आर्किटेक्ट की मांग लगातार बनी रहती है। आर्किटेक्चर के क्षेत्र में डिजाइनर, इंटीरियर डिजाइनर, प्रोजेक्ट मैनेजर, आर्ट डायरेक्टर, अर्बन प्लानर, लैंडस्केप डिजाइनर, बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टर आदि के रूप में करियर बनाया जा सकता है। यदि आप कुछ वर्षों का अनुभव हासिल कर लेते हैं, तो आप सलाहकार के रूप में भी अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।


रेडियो के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए कम से कम इण्टरमीडिएट पास होना जरूरी है। इसके बाद आप ग्रेजुएशन में मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म करके इस फील्ड में आगे बढ़ सकते हैं। कई संस्थान रेडियो जॉकी, रेडियो प्रोडक्शन, रेडियो मैनेजमेंट आदि में शॉर्ट टर्म और डिप्लोमा कोर्स कराते हैं। आप ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में जाकर भी शॉर्ट टर्म कोर्स कर सकते हैं या किसी अनुभवी वॉइस ओवर आर्टिस्ट से भी बहुत कुछ सीख सकते हैं। रेडियो के क्षेत्र में अच्छी आवाज के साथ-साथ लेखन, प्रोग्राम मैनेजमेंट, म्यूजिक शेड्यूलिंग, पॉडकास्टिंग और सोशल मीडिया हैंडलिंग वग़ैरह में भी करियर बनाया जा सकता है। रेडियो जॉकी के अलावा आप रेडियो में साउंड इंजीनियर प्रोग्राम प्रोड्यूसर सहित अन्य कई पदों पर काम कर सकते हैं।


BSc. एग्रीकल्चर के बाद, आप किसी कृषि अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिक के रूप में अपना करियर शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा एग्रीकल्चर में कोई भी विषय चुनकर Ph.D कर सकते हैं। Ph.D के बाद प्राइवेट या सरकारी एग्रीकल्चर कॉलेज में लेक्चरशिप भी मिल सकती है। कृषि विभाग में कई भर्तियां निकलती रहती हैं। आप कृषि क्षेत्र अधिकारी, विकास अधिकारी आदि नौकरियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। आप जैव रसायन, बागवानी, कीट विज्ञान, कृषि अर्थशास्त्र, जैव प्रौद्योगिकी, आनुवंशिकी, कृषि विज्ञान सहित कई क्षेत्रों में काम कर सकते हैं। कृषि स्नातकों के लिए बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों में कृषि क्षेत्र अधिकारी, कृषि अधिकारी, प्रमाणन अधिकारी के रूप में कई बेहतरीन अवसर रहते हैं।


बैचलर ऑफ लॉ (LLB) के लिए दो विकल्प हैं। सबसे पहले आप ग्रेजुएशन डिग्री के बाद 3 साल का LLB कोर्स कर सकते हैं। दूसरे, अगर आपने 12वीं पास कर ली है तो आपके लिए 5 साल का इंटीग्रेटेड कोर्स उपलब्ध है। इस कोर्स में LLB डिग्री के साथ-साथ B.A, BBA जैसे ग्रेजुएट प्रोग्राम ऑफर किए जाते हैं। जबकि मास्टर ऑफ लॉ (LLM) एक वर्ष से अधिक अवधि का कोर्स है। इसके लिए आपके पास LLB की डिग्री होनी चाहिए। LLB करने के बाद आप PCS परीक्षा के लिए पात्र हो जाते हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में कानूनी पेशेवरों की मांग है। आप विभिन्न सरकारी विभागों और न्यायाधिकरणों में एक कानूनी पेशेवर के रूप में भी काम कर सकते हैं।


बैंकिंग सेक्टर कॉमर्स के सबसे प्रमुख क्षेत्रों में से एक है। अगर आप सरकारी बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) बनना चाहते हैं तो आपको राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित IBPS PO परीक्षा पास करनी होगी। भारतीय स्टेट बैंक भी SBI क्लर्क और PO के लिए रिक्तियां जारी करता रहता है। संबंधित परीक्षाओं को पास करके आप एसबीआई बैंक में नौकरी पा सकते हैं। SSC-CGL परीक्षा पास करने के बाद आपको असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर या स्टैटिस्टिकल इन्वेस्टिगेटर ग्रेड-2 जैसे पदों पर सरकारी नौकरी पाने का मौका मिल सकता है। इसके अलावा आप भारतीय रेलवे में कमर्शियल अप्रेंटिस असिस्टेंट स्टेशन मास्टर जैसे पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। सिविल सेवा परीक्षा से आप IAS और IPS जैसे उच्च पदों पर काम कर सकते हैं।


ग्रामीण विकास में स्नातकोत्तर करने के बाद आपके पास सरकारी या गैर-सरकारी दोनों तरंह के संस्थानों में नीति निर्माता, विश्लेषक, प्रबंधक, ग्रामीण विकास अधिकारी, अनुसंधान, सलाहकार आदि के रूप में काम करने के अवसर होते हैं। इसके अलावा आप गांवों के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों के साथ भी काम कर सकते हैं। कई संस्थाएं ग्रामीण प्रबंधक के रूप में पेशेवरों की नियुक्ति भी करती हैं। इसके अलावा आप चाहें तो अपनी खुद की NGO खोलकर ग्रामीण विकास के लिए काम कर सकते हैं। अगर इस क्षेत्र में अनुमानित सैलरी की बात करें तो आप किसी प्राइवेट कंपनी या फिर संस्था के साथ जुड़कर सालाना 4 से 5 लाख रूपये तक कमा सकते हैं।


बायोटेक्नोलॉजी में BSc डिग्री वालों के लिए प्राइवेट और सरकारी दोनों क्षेत्रों में ख़ूब अवसर हैं। आप रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, फार्मास्युटिकल कंपनी, गवर्नमेंट लैबोरेट्रीज आदि में साइंटिफिक अस्सिटेंट, रिसर्च एनालिस्ट, प्रोसेस एंड डेवलपमेंट टेक्नीशियन आदि के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के अग्रणी संस्थानों जैसे बायोटेक कंसोर्टियम इंडिया लिमिटेड, ऑल इंडिया बायोटेक एसोसिएशन, राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी आदि जैव प्रौद्योगिकी में बीएससी उम्मीदवारों के लिए भर्ती प्रक्रिया का संचालन करते हैं। निजी क्षेत्र में विभिन्न अनुसंधान फार्मों, खाद्य उत्पादन फार्मों, नैदानिक ​​अनुसंधान फर्मों, प्रयोगशालाओं आदि में भी अवसर मौजूद हैं। Ph.D करने के बाद आप अकादमिक क्षेत्र में भी अपना करियर बना सकते हैं।


कई कंपनियां पॉलिटेक्निक से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारकों को जूनियर स्तर के पदों पर नौकरियां देती हैं। सरकारी और PSU कंपनियों में भारतीय सेना, ONGC, DRDO, BHEL, NTPC, BSNL जैसे बड़े सरकारी संस्थान पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों को बेहतरीन करियर के मौकों की पेशकश करते हैं। किसी भी संस्थान में उच्च पद पर नौकरी पाने के लिए पॉलिटेक्निक के अलावा ग्रेजुएशन की डिग्री या इंजीनियरिंग करना फायदेमंद रहता है। अगर सैलरी की बात करें तो एक इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर के तौर पर आप शुरुआती दौर में हर साल औसतन 5 से 6 लाख रुपये तक कमा सकते हैं। अनुभव के साथ इस क्षेत्र में वेतन की संभावनाएं तेजी से बढ़ती हैं।


अगर आप 12वीं क्लास में हैं तो आप इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट के विभिन्न पाठ्यक्रमों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं। इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट में कई तरंह के डिप्लोमा, प्रमाणपत्र और अन्य अल्पकालिक पाठ्यक्रम हैं। यह मैनेजमेंट स्टडीज़ की एक ब्रांच है जिसके अंतर्गत किसी भी उद्योग में उपयोग किए जाने वाले उपकरण जैसे मशीनरी, केमिकल वग़ैरह के खतरों, घटनाओं और स्वास्थ्य जोखिमों से श्रमिकों की सुरक्षा के बारे में सिखाया जाता है। इस कोर्स को करने के बाद आपको फायर प्रोटेक्शन इंजीनियर, एनवायरमेंट सेफ्टी मैनेजर, कंस्ट्रक्शन सेफ्टी मैनेजर, हाइजीन मैनेजर, रिस्क मैनेजमेंट कंसल्टेंट वग़ैरह के पदों पर काम करने का मौका मिलता है।


अगर आपने राजनीति विज्ञान में नेट उत्तीर्ण किया है तो आप किसी भी मान्यता प्राप्त सरकारी या निजी कॉलेज में प्रोफेसर या लेक्चरर पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। आप अपने कोचिंग सेंटर या किसी संस्थान में विद्यार्थियों को नेट परीक्षा की तैयारी भी करवा सकते हैं। आप किसी कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी भी बन सकते हैं। आप सलाहकार या प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव के तौर पर भी अपनी सेवाएँ प्रदान कर सकते हैं। लेक्चरर के अलावा अन्य क्षेत्रों में करियर विकल्पों की बात करें तो राजनीतिक सलाहकार और नीति विश्लेषक आदि के रूप में भी करियर बनाया जा सकता है। सरकारी क्षेत्र में करियर बनाने के लिए अच्छे अवसर उपलब्ध रहते हैं। रेलवे, SSC, सिविल सेवा आदि प्रतियोगी परीक्षाओं को उत्तीर्ण करके सरकारी नौकरी पा सकते हैं। इन क्षेत्रों में आप पद और संस्थान के अनुसार सैलरी पा सकते हैं।


सोशियोलॉजी में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद आप मुख्य तौर पर सोशियोलॉजिस्ट कम्युनिटी ऑर्गेनाइजर, प्रोफेसर, लेक्चरर, कंसलटेंट या काउंसलर के प्रोफाइल पर काम कर सकते हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान, राष्ट्रीय पुस्तकालय, संसदीय सेवाओं तथा सरकारी मंत्रालय सहित विविध केंद्र सरकारी विभागों में भी अवसर मौजूद रहते हैं। इसके अलावा आपके पास सरकारी व निजी दोनों क्षेत्रों में रोजगार के कई विकल्प उपलब्ध होते हैं। प्रशासनिक सेवाओं के अलावा आप ग़ैर-सरकारी संगठनों के साथ भी काम कर सकते हैं। मीडिया और कॉरपोरेट हाउस में भी अपने लिए अवसर तलाश कर सकते हैं। आप पर्यावरण, लिंग भेद आदि सामाजिक मुद्दों पर भी काम कर सकते हैं। साथ ही यूनिसेफ और रेडक्रॉस जैसे संस्थानों में विशेषज्ञ के तौर पर भी नौकरी हासिल कर सकते हैं।


अगर आपने 12वीं पास कर ली है तो आप स्टेनोग्राफर बनने के लिए किसी पॉलिटेक्निक, आईटीआई या अन्य संस्थान से स्टेनोग्राफी में डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं। साथ ही आपको कंप्यूटर टाइपिंग का ज्ञान होना भी जरूरी है। यदि आप शॉर्टहैंड सीख जाते हैं और आपकी टाइपिंग स्पीड और प्रैक्टिस अच्छी हो जाती है तो नौकरी के कई अवसर खुल जाते हैं। स्टेनोग्राफर के पद पर भर्ती के लिए परीक्षाएं कर्मचारी चयन आयोग एसएससी, हाई कोर्ट, रेलवे आदि द्वारा आयोजित की जाती हैं। राज्य सरकार अपने विभागों में स्टेनोग्राफर के पदों के लिए समय-समय पर विज्ञापन जारी करती रहती है। जिसके लिए आप आवेदन कर सकते हैं। इन परीक्षाओं को पास करने के बाद आप गृह मंत्रालय, एनएसडीसी और भारतीय सेना जैसे विभागों में काम कर सकते हैं।


MSc. (फिजिक्स) करने के बाद नेट क्वालीफाई करके या Ph.D की डिग्री हासिल करके आपके पास प्रतिष्ठित कॉलेजों में लेक्चरर बनने का विकल्प होगा। इसके अलावा आप संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षाओं के साथ बैंक और रेलवे वग़ैरह सरकारी क्षेत्र में भी आवेदन कर सकते हैं। अगर आपका इंटरेस्ट रिसर्च आर्गेनाईजेशन में जाने का है तो ISRO, DRDO और BARC में अप्लाई कर सकते हैं। आप जियोफिजिस्ट, नैनोटेक्नोलॉजिस्ट, परमाणु लैब्स, टीसीएल, सोलर इंडस्टरीज इंडिया लिमिटेड वग़ैरह में भी करियर के बेहतरीन विकल्प तलाश कर सकते हैं।


बिना ग्रेजुएशन के भी आपके पास तकनीकी/गैर-तकनीकी पदों पर अपना करियर बनाने के कई विकल्प हैं। आप विज्ञान, वाणिज्य, कला और मानविकी स्ट्रीम में उपलब्ध विभिन्न पाठ्यक्रमों में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं। अगर आपने 12वीं फिजिक्स और गणित विषयों से पास की है तो आप कमर्शियल पायलट कोर्स भी कर सकते हैं। एविएशन सेक्टर में आप एयर होस्टेस, फ्लाइट अटेंडेंट आदि के तौर पर काम कर सकते हैं। शेयर और स्टॉक एक्सचेंज फाइनेंस आदि में डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स करके आप प्राइवेट बैंकों, इंश्योरेंस सेक्टर में काम कर सकते हैं। आप डिजिटल मार्केटिंग में सर्टिफिकेट कोर्स करके सोशल मीडिया मैनेजर आदि भी बन सकते हैं। नॉन-टेक्निकल पाठ्यक्रमों की बात करें तो आप विदेशी भाषा में डिप्लोमा/सर्टिफिकेट कोर्स करके ट्रांसलेटर भी बन सकते हैं।


12वीं के बाद कई यूनिवर्सिटी प्रवेश परीक्षा के आधार पर BSc. में एडमिशन देते हैं और कुछ डायरेक्ट एडमिशन भी देते हैं। जीव विज्ञान के क्षेत्र में माइक्रोबायोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी तेजी से लोकप्रिय होने वाले पाठ्यक्रम हैं। इसके अलावा आप पैरामेडिकल कोर्स BMLT, बीएससी नर्सिंग, बीफार्मा, रेडियोग्राफी, न्यूट्रिशन एंड डायटीशियन, डर्मेटोलॉजी आदि विषयों में डिग्री डिप्लोमा/कोर्स भी कर सकते हैं। अगर आप डॉक्टर बनना चाहते हैं तो NEET क्वालिफाई करने के बाद MBBS, BDS, BAMS, BUMS आदि बैचलर कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों से लेकर मेडिकल फील्ड रिसर्च, कृषि विभाग, फार्मास्युटिकल सरकारी लैब और केमिकल उद्योग, क्रिमिनोलॉजी, जेनेटिक्स और फोरेंसिक साइंस जैसे कई क्षेत्रों में आपके लिए अपार संभावनाएं हैं।


होटल मैनेजमेंट से संबंधित कोर्स करने के लिए आपका 12वीं पास होना ज़रूरी है। 12वीं में अंग्रेजी विषय अनिवार्य रूप से होना चाहिए। 12वीं के बाद आप बैचलर इन होटल मैनेजमेंट, बैचलर इन होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी, बीएससी इन हॉस्पिटलिटी एंड होटल एडमिनिस्ट्रेशन जैसे कोर्स चुन सकते हैं। सफल होने के लिए कुछ व्यक्तिगत गुणों का होना भी जरूरी होता है जैसे मृदुभाषी होना, सेवा और आतिथ्य को धर्म की तरहं मानना आदि। हॉस्पिटैलिटी उद्योग में विभिन्न प्रकार की नौकरियां उपलब्ध हैं जैसे मैनेजर फ्रंट ऑफिस हाउसकीपिंग, बैंक्वेट मैनेजर या फास्ट फूड जॉइंट, आप हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन और कैटरिंग आदि में भी करियर बना सकते हैं।


12वीं पास करने के बाद मेरे पास सरकारी नौकरी के क्या विकल्प हैं?

12वीं पास करने के बाद आपके पास सरकारी नौकरी पाने के कई मौके होते हैं। आप अपनी योग्यता और रुचि के अनुसार स्टेनोग्राफर, मल्टी टास्किंग स्टाफ, फॉरेस्ट गार्ड, पोस्टल असिस्टेंट, डाटा एंट्री ऑपरेटर, रेलवे ग्रुप डी, रेलवे क्लर्क, रेलवे कांस्टेबल के लिए अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर सकते हैं। इन परीक्षाओं में आवेदन के लिए निर्धारित आयु सीमा का भी ध्यान रखें। अगर आप 12वीं के बाद ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन करते हैं तो आपके लिए उच्च पदों पर जाने के दरवाजे खुल जाते हैं। आप SSC-CGL और बैंक PO जैसी सिविल सेवा परीक्षा में बैठने के पात्र बन जाते हैं। वहीं, B.Ed. या M.Ed. की डिग्री प्राप्त करने के बाद आप सरकारी स्कूल में शिक्षक के तौर पर पढ़ा भी सकते हैं।


मरीन इंजीनियर नवल आर्किटेक्ट के रूप में काम करते हैं। उनका काम वाणिज्यिक या नौसैनिक उपयोग के लिए जहाज से संबंधित उपकरणों का निर्माण, डिजाइन और व्यवस्था करना होता है। ऐसे में जहाज के इंटीरियर को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी एक मरीन इंजीनियर की होती है। एक पेशेवर इंजीनियर बनने के लिए, एक मरीन इंजीनियर को शिपिंग मंत्रालय से लाइसेंस प्राप्त करना होता है। लाइसेंस प्राप्त करने से पहले कुछ सालों का पेशेवर अनुभव होना आवश्यक है। इसके अलावा मरीन इंजीनियरिंग करने के बाद आप अपनी रुचि के अनुसार इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, पावर प्लांट, न्यूक्लियर साइंस आदि क्षेत्रों में भी जा सकते हैं। आपको इंजन उत्पादन फर्मों, जहाज निर्माण फर्मों या भारतीय नौसेना में काम करने का मौका भी मिल सकता है।


केमिस्ट्री से MSc. पास करने के बाद आप कई रिसर्च इंस्टीट्यूट में अप्लाई कर सकते हैं। ऐसे संस्थानों में ISRO, DRDO, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर, एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर ट्रीटमेंट, रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर भी शामिल हैं। आप क्लिनिकल रिसर्च एसोसिएट, लैब असिस्टेंट, फार्मास्यूटिकल, एग्रोकेमिकल, पेट्रोकेमिकल, प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग रिसर्च सेंटर, केमिकल मैन्युफैक्चरिंग, फॉरेंसिक और सेरेमिक इंडस्टरीज जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर सकते हैं। अगर आपकी रुचि एजुकेशन सेक्टर में है तो आप NET क्वालीफाई करके या Ph.D करके किसी भी कॉलेज में लेक्चरर या प्रोफेसर बन सकते हैं। NET JRF एग्जाम क्वालीफाई करने के बाद आपको रिसर्चर के पद पर भी नौकरी मिल सकती है।


अगर आपका B.Tech. कोर्स अच्छा रहा है और आपकी अपने विषयों पर अच्छी पकड़ है तो आपको GATE परीक्षा की तैयारी करना चाहिए। GATE यानी ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग इस परीक्षा में ऎसे छात्र बैठते हैं जिन्हें IIT और NIT जैसे सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में M.Tech. , MCA, MSc या M.Arch जैसे पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेना होता है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि GATE पास उम्मीदवार के लिए रोजगार के कई अवसर सीधे आते हैं जैसे आपको भारत में विभिन्न PSU यानी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम कंपनियों में सीधे नियुक्ति मिल सकती है। आपका GATE स्कोर जितना बेहतर होगा। इन कंपनियों में आपको सीधी नियुक्ति मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च यानी CSIR, ISRO और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर जैसे संस्थान स्कॉलरशिप के तहत रिसर्च के लिए फेलोशिप के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं और आपके जैसे उम्मीदवारों को रिसर्च के लिए नियुक्त करते हैं। माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, अमेज़न, सिस्को जैसी कंपनियों में GATE स्कोर को प्रमुख योग्यता मानकर कई पदों पर सीधी भर्ती की जाती है।


12वीं करने के बाद आप रेलवे भर्ती बोर्ड RRB द्वारा जूनियर क्लर्क कम टाइपिस्ट, अकाउंट क्लर्क कम टाइपिस्ट, ट्रेन क्लर्क, कमर्शियल कम टिकट क्लर्क, भर्ती बोर्ड RRB Group-D में असिस्टेंट पॉइंट्समैन, असिस्टेंट ब्रिज व् ट्रैक मेंटेनर ग्रेड-IV आदि पदों के लिए आयोजित भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। 10वीं और ITI पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं। इन पदों पर आवेदन करने की आयु सीमा 18 साल से 33 साल निर्धारित की गई है। अगर आपने ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल कर ली है तो आपको इस क्षेत्र में सीनियर कमर्शियल कम टिकट क्लर्क, स्टेशन मास्टर और अन्य पदों पर भी नौकरी मिल सकती है।


एक क्वालिफाइडआयुर्वैदिक प्रैक्टिशनर बनने के लिए बैचलर आफ आयुर्वैदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) कोर्स करना जरूरी होता है। MBBS की तरंह ही BAMS, BHMS और BUMS जैसे कोर्स में दाखिला नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) द्वारा मिलता है। कुछ प्राइवेट कॉलेज भी BAMS जैसे कोर्स में दाखिले के लिए एंट्रेंस टेस्ट करवाते हैं। इसके अलावा प्राइवेट कॉलेज में सीधे मेरिट के आधार पर भी एडमिशन होते हैं मगर उनमें सीटें सीमित होती हैं। BAMS करने के बाद आपके पास सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में नौकरी की बेहतर संभावनाएं होती हैं। आप कुछ समय प्रेक्टिस करके अपना आयुर्वैदिक क्लिनिक भी खोल सकते हैं।


पॉलिटेक्निक से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा होल्डर्स को कई कंपनियां जूनियर लेवल पोजीशन के लिए नौकरी ऑफर करती हैं। रेलवे, भारतीय सेना, GAIL , ONGC, DRDO, NTPC, BSNL जैसे बड़े सरकारी संस्थान पॉलिटेक्निक डिप्लोमा होल्डर्स को करियर के बेहतरीन अवसर प्रदान करते हैं। किसी भी आर्गेनाइजेशन में उच्च पद पर नौकरी पाने के लिए पॉलिटेक्निक के अलावा इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन करना फायदेमंद रहता है। वहीं अगर सैलरी की बात की जाए तो इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर के तौर पर आप शुरुआती दौर में हर साल 5 से 6 लाख ₹ तक आराम से कमा सकते हैं। इस क्षेत्र में वेतन की संभावनाएं अनुभव के साथ तेजी से बढ़ती हैं।


बागवानी में स्नातकोत्तर करने के बाद आप तकनीकी अधिकारी, उद्यान अधिकारी, कृषि अधिकारी, पुष्प एवं सब्जी निरीक्षक, उद्यान पर्यवेक्षक, कृषि विकास अधिकारी, बागवानी विशेषज्ञ, खाद्य सब्जी निरीक्षक के रूप में करियर बना सकते हैं। इसके अलावा आप IARI, CSIR, NBRI, APED व् ICAR भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद जैसी विभिन्न सरकारी एजेंसियों में भी काम कर सकते हैं। वहीं आप बागवानी में नेट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद या Ph.D. करके किसी कृषि महाविद्यालय में लेक्चरर या असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नौकरी कर सकते हैं। अगर आप चाहें तो अनुसंधान के क्षेत्र में भी आगे बढ़ सकते हैं। इसके अलावा आप प्राइवेट कम्पनियों में हॉर्टिकल्चर स्पेशलिस्ट के तौर पर भी काम कर सकते हैं।


राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद अगर आप पढ़ाई के क्षेत्र में जाना चाहते हैं तो NET परीक्षा पास कर के या Ph.D. की डिग्री हासिल करने के बाद आप किसी भी कॉलेज में लेक्चरर/प्रोफेसर के तौर पर काम कर सकते हैं। लेक्चरर बनने के अलावा भी आपके पास रोजगार के कई विकल्प होते हैं। अगर आपकी रुचि पत्रकारिता में है तो आप जनरलिज्म का कोर्स करके प्रिंट मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए राजनीतिक संवाददाता, कंटेंट राइटर या संपादक बन सकते हैं। आप राजनीतिक सलाहकार, नीति विश्लेषण या सरकारी मामलों के निदेशक के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अलावा आपके पास सिविल सेवा से लेकर SSC जैसी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को पास कर के सरकारी नौकरी पाने के विकल्प मौजूद होते हैं।


अगर आप एथिकल हैकर के रूप में करियर बनाना चाहते हैं तो 12वीं और ग्रेजुएशन के बाद इससे संबंधित कोर्स कर सकते हैं। इस क्षेत्र में सर्टिफिकेट कोर्स इन साइबर लॉ, सीसीएनए सर्टिफिकेशन, सर्टिफाइड एथिकल हैकर, एसएससी साइबर फोरेंसिक एंड इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी, पीजी डिप्लोमा इन साइबर लॉ, एडवांस्ड डिप्लोमा इन एथिकल हैकिंग जैसे कोर्स उपलब्ध हैं। इस क्षेत्र में आपको कंप्यूटर भाषाओं जैसे C++, Java, Python, HTML कोडिंग क्रिप्टोग्राफी आदि का अच्छा ज्ञान होना चाहिए, तभी आप हैकिंग सीख सकते हैं। साथ ही इस क्षेत्र में आपको कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और कंप्यूटर में उपयोग होने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम का अच्छा ज्ञान होना चाहिए। कोर्स करने के बाद आप आईटी सेक्टर आदि में विभिन्न सरकारी या गैर-सरकारी संस्थानों के साथ काम कर सकते हैं।


हॉस्पिटल मैनेजमेंट में प्रवेश के लिए 12वीं साइंस स्ट्रीम में निर्धारित अंकों के साथ उत्तीर्ण होना जरूरी है। जिसके बाद आप बैचलर ऑफ हॉस्पिटल मैनेजमेंट कर सकते हैं। इस कोर्स की अवधि 3 वर्ष है. जबकि मास्टर ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन और एमबीए इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन करने के लिए अवधि 2 वर्ष निर्धारित है। अपनी स्नातक की डिग्री पूरी करने के बाद, आप सहायक अस्पताल प्रशासक या प्रबंधक के रूप में अपना करियर शुरू कर सकते हैं। कोई व्यक्ति विभिन्न अस्पताल क्षेत्रों में विभागाध्यक्ष, चिकित्सा निदेशक, नर्सिंग निदेशक, स्वास्थ्य देखभाल वित्त प्रबंधक के रूप में काम कर सकता है। इसके अलावा आप मैक्स, वॉकहार्ट, फोर्टिस हेल्थ केयर लिमिटेड जैसे देश के अग्रणी संस्थानों से भी जुड़ सकते हैं।


किसी बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर (पीओ) बनने के लिए, अधिकांश सरकारी बैंक आईबीपीएस पीओ के माध्यम से उम्मीदवारों की भर्ती करते हैं, जबकि एसबीआई बैंक एसबीआई पीओ परीक्षा के माध्यम से उम्मीदवारों की भर्ती करते हैं और आरआरबी भी अलग पीओ परीक्षा आयोजित करता है। आईबीपीएस द्वारा आयोजित परीक्षा के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक है। आपकी उम्र 21 से 30 साल के बीच होनी चाहिए। यह परीक्षा तीन चरणों में ली जाती है। प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार। प्रारंभिक परीक्षा में तीन पेपर और मुख्य परीक्षा में चार पेपर होते हैं। प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आपको साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है। इन तीन चरणों को पास करने के बाद आपको बैंक में पीओ का पद मिलता है।


रूरल डेवलपमेंट का अर्थ ग्रामीण क्षेत्र का समग्र विकास है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और सामुदायिक सेवा जैसे कई पहलू शामिल हैं। इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए आप 12वीं उत्तीर्ण होना चाहिए। इसके बाद आप सोशल वर्क या मैनेजमेंट में ग्रेजुएशन व् पोस्ट ग्रेजुएशन और स्पेशलाइजेशन कोर्स कर सकते हैं। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद आप सोशल वर्क में पीएचडी भी कर सकते हैं। इसके बाद आप कई सरकारी और निजी क्षेत्रों में रूरल डेवलपमेंट ऑफिसर, सेल्स ऑफिसर, मैनेजर, एनालिस्ट या रिसर्चर आदि पदों पर काम कर सकते हैं। इसके अलावा सहकारी क्षेत्र, खाद्य एवं कृषि विपणन आदि कंपनियों में भी नौकरी पा सकते हैं।
आप अपना खुद का स्टार्टअप भी शुरू कर सकते हैं।


पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद आप नेट परीक्षा उत्तीर्ण करके असिस्टेंट प्रोफेसर बन सकते हैं। इसके अलावा आप कॉलेज में लेक्चरर के तौर पर पढ़ा सकते हैं। आप निजी संस्थानों में भी काम कर सकते हैं। इसमें निजी शिक्षक भी शामिल हैं। आप ऑनलाइन टीचिंग, एजुकेशनल कंसल्टेंट, एजुकेशन रिसर्च, कंटेंट राइटर, एकेडमिक काउंसलर आदि पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। आप मानव संसाधन विकास मंत्रालय से जुड़े संगठन में आवेदन करके इस क्षेत्र में नौकरी की तलाश कर सकते हैं। इसके अलावा आप प्रशिक्षण कंपनियों, खेल केंद्रों, किशोर केंद्रों, शैक्षिक मार्गदर्शन, नगर निगम स्कूलों आदि में शिक्षक के रूप में भी अपना करियर बना सकते हैं।


सबसे पहले आपको 12वीं PCM से निर्धारित अंकों के साथ पास करना होगा। इसके बाद B.Tech. में एडमिशन लेना होगा जिसके लिए लिए IIT-JEE प्रवेश परीक्षा पास कर सकते हैं। B.Tech. में एयरोनॉटिकल या एयरोस्पेस में से किसी एक ब्रांच को चुनना होगा। एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में B.Tech. कोर्स 4 साल का होता है। यह एक अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम होता है जिसमें एयरोडायनामिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे किसी एक सब्जेक्ट में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। इस कोर्स में फ्लाइट डाइनामिक्स, एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी एंड मशीन, एयरक्राफ्ट स्ट्रक्चर, रॉकेट मिसाइल, स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे कई विषयों की जानकारी होती है। संबंधित अवसरों की बात की जाए तो एयरोस्पेस इंजीनियर की भर्ती भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), एयर इंडिया नागरिक उड्डयन विभाग जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी करते हैं।

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